Constantine In Hindi Today

कॉन्स्टेंटाइन एक जटिल शख्सियत थे। एक ओर, उन्होंने ईसाई धर्म को उत्पीड़न से मुक्ति दिलाई और उसे साम्राज्य का प्रमुख धर्म बनाया। दूसरी ओर, वे अपने निजी जीवन में क्रूर भी थे — उन्होंने अपनी पत्नी फ़ॉस्टा और अपने बड़े बेटे क्रिस्पस को मौत की सज़ा दी थी।

इतिहास के पन्नों में कुछ शासक ऐसे होते हैं जो सिर्फ अपने युग को ही नहीं, बल्कि सदियों के भविष्य को भी प्रभावित करते हैं। फ्लेवियस वैलेरियस औरेलियस कॉन्स्टेंटाइन, जिन्हें 'कॉन्स्टेंटाइन द ग्रेट' के नाम से जाना जाता है, बिल्कुल ऐसे ही शासक थे। वे रोमन साम्राज्य के उस सम्राट थे जिन्होंने न केवल एक विशाल साम्राज्य को फिर से एकजुट किया, बल्कि विश्व के सबसे बड़े धर्मों में से एक, ईसाई धर्म, को भूमिगत से बाहर निकालकर सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाया। constantine in hindi

प्रभावित होकर, कॉन्स्टेंटाइन ने अपने सैनिकों की ढालों पर ईसाई प्रतीक 'क्राइस्टोग्राम' (Chi-Rho) बनवा दिया। मिल्वियन ब्रिज के युद्ध में उन्होंने मैक्सेंटियस को बुरी तरह पराजित किया। यह जीत रोमन साम्राज्य के लिए तो चरम पर थी ही, साथ ही इसने कॉन्स्टेंटाइन को ईसाई धर्म की तरफ झुका दिया। हालाँकि उनका पूर्ण बपतिस्मा अपने जीवन के अंतिम समय (337 ईस्वी) में हुआ, लेकिन इस घटना के बाद से वे ईसाई धर्म के संरक्षक बन गए। constantine in hindi

कॉन्स्टेंटाइन ने सिर्फ ईसाई धर्म को स्वतंत्रता ही नहीं दी, बल्कि उसके भीतर एकता स्थापित करने का भी प्रयास किया। 325 ईस्वी में उन्होंने 'निकिया की परिषद' (Council of Nicaea) बुलाई। यह ईसाई इतिहास की पहली विश्वव्यापी परिषद थी, जिसमें ईसा मसीह के देवत्व और त्रिएकत्व (ट्रिनिटी) सिद्धांत को मान्यता दी गई। इस परिषद ने नाइसिन पंथ (Nicene Creed) की रचना की, जो आज भी कई ईसाई संप्रदायों में प्रार्थना का हिस्सा है। constantine in hindi

कॉन्स्टेंटाइन का जन्म लगभग 272 ईस्वी में मेसिया (आधुनिक सर्बिया) में हुआ था। उनके पिता कॉन्स्टेंटियस क्लोरस रोमन सेना के एक उच्च अधिकारी थे और बाद में पश्चिमी रोमन साम्राज्य के सम्राट बने। कॉन्स्टेंटाइन ने अपनी युवावस्था का अधिकांश समय सम्राट डायोक्लेटियन के दरबार में बिताया, जहाँ उन्होंने सैन्य और प्रशासनिक कौशल सीखे।